रांची:
झारखंड में विकास के लिए संसाधनों की प्रचुरता की हमेशा चर्चा की जाती रही है। लेकिन शिकायत भी आम है कि ऐसी किसी योजना के लिए जब जमीन सरकार लेती है, तो रैयतों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए आज रांची सांसद संजय सेठ और मांडर विधायक बंधु तिर्की की बैठक हुई। जिसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, मानातू कैम्पस निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई 500 एकड़ भूमि के प्रभावित भू- रैयतों के मुआवजा एवं पुनर्वास पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में निर्णय लिया गया विष्वविद्यालय के सभी संकायों में कम से कम पांच स्थानीय छात्रों का नामांकन लेना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गों के नौकरियों में विस्थापितों और स्थानीय को ही लेना है।
जब तक रैयतों को मुआवजा नहीं मिल जाता रैयती भूमि पर किसी भी प्रकार निर्माण कार्य नहीं होगा। स्थानीय ग्रामीण और विस्थापितों के लिए स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था विश्वविद्यालय को करनी होगी।

अगली बैठक उपायुक्त रांची की अध्यक्षता में होगी। बता दें कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी मानातू कैंपस के लिए अधिग्रहित तकरीबन 500 एकड़ भूमि में 139.17 एकड़ रैयती भूमि है। मौके पर विष्वविद्यालय के कुलपति,धर्मगुरू बंधन तिग्गा,एस.डी.एम, अपर समाहर्ता रांची, भूअर्जन पदाधिकारी,रांची, कांके अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी, कांके एवं विस्तापित और ग्रामीण उपस्थित थे।